नहज् अल् बलाग़ह्


1. من آمن خائفا من مخوفة، آمنه الله سبحانه من عقابه:

जो व्यक्ति अल्लाह पर ईमान-निष्ठा लाया उस चीज़ की भय से, जो चीज़ उस व्यक्ति को भय प्रदर्शन कराता है, अल्लाह उस को उसी चीज़ कि भय की कारण से अमन में रखता है)

2. اياک أن تستخف بالعلماء، فإن ذلک يزری بک ويسيء الظن بک والمخيلة فيک:

आलिम व ज्ञानी व्यक्तियों को साधारण मत समझे, क्योंकि यह काम तुम को पथभ्रष्ट करता है और अन्य व्यक्तियों को तुमहारे ऊपर बदगुमान कराता है, और जनसाधारण के सम्मुख़ तुम को बदनाम कराता है।

3. الاحتکار شيمة الفجاٌر

सुविधा भोग करना ख़राब व गूनाहगार व्यक्तियों का (चरीत्र ) काम है।

4. امارات الدول انشاء الحليل

राष्ट्रपति व सरकार परिवर्तन करने का अलामत, धोका और मक्र को स्पष्ट करना।

5. رب محتال صرعته حيلته

मुमकिन है कि धोका देने वाला ख़ुद अपने धोके से धोका खा जाए।

6. الخذلان ممد الجهل:

अल्लाह के दर्बार में तौफ़ीक पैदा न-करना, तथा अज्ञानों कीे सहायता करना।

7. من علامات الخذلان استحسان القبيح:

नेक और सदाचर कर्मों को परीत्याग करना तथा अधिक से अधिक ख़राब काम है।

8. من اعتز بغير الله ذل:

जो व्यक्ति अल्लाह व्यतीत इज्ज़त मांगे वह व्यक्ति ज़लील है।

9. سبب الفقر الاسراف:

फ़की़र व सन्यासी होने का मुल कारण (वेशी से वेशी) मुफ्त खर्च करना।

10. ليس في سرف شرف

मुफ्त ख़र्च में शराफ़त नहीं है।

11. سهر العيون بذکرالله خلصان العارفين و حلوان المقربين:

रातों को जाग कर अल्लाह की ईबादत करना आरेफान व्यक्तियों के निकट ख़ालिस ईबादत की अलामत है. और अच्छे काम अल्लाह के निकट ग्रहण के उपयूक्त है।

12. الطمع اول الشر

ख़राब काम का प्रथम स्तर लोभ है।

13. دلالة حسن الورع عزوف النفس عن مذلة الطمع

सदाचर, परहेज़गार और पथ प्रदर्शक व्यक्तियों के अलामत, लोभ व ज़िल्लत से दूर (विरत) रखना।

14. من عرض نفسه للتهمة فلا يلومن من اساء الظن به:

जो व्यक्ति अपने को वदनाम करके रखे है, उस व्यक्ति के लिए उचित नहीं है. कि जो व्यक्ति उस को बदनाम व अपबाद क़रार दिया है उस पर बदगुमान करे।

15. من قرب من الدنية اتهم:

जो व्यक्ति विशेष स्थान के निकट होना या चाहता है वह अपवाद-बदनाम होता है।

16. من عير بشئ بلی به:

जो व्यक्ति अन्य व्यक्तियों को बदनाम करता है खुद उसी बदनामी में फाँस जाता है।

17. کثرة التقريع توغر القلوب و توحش الاصحاب:

उपहास ( मज़ाक़) करना और गंभीर मन के साथ हिसाँ व पर्या लोचना करना अपने दोस्त को अपने से दूर करना है।

18. الغش يکسب المسبة:

धोका साधारण जनता के लिए दुश्मनी का कारण बनता है।

19. من غلب عليه الهزل فسد عقله:

जिस व्यक्ति पर (कौतुक) मज़ाक़ हाकिम रहा उस की अक़्ल नीस्त व नाबूद हो गई है।

20. الکامل من غلب جده هزله:

परिपूर्ण व्यक्ति वह है जो व्यक्ति अपनी ज़वान को मज़ाक पर क़ाबू रखे।

21. من اشتغل بغير المهم ضيع الاهم:

जो व्यक्ति विभिन्न प्रकार कर्मों में मश्गूल रहे वह गुरुत्व नहीं है. बल्कि गुरुत्व वह हे जो गुरुत्वपूर्ण कार्य से दूर न-रहे।

22. اجعل کل همک و سعيک للخلاص من محل الشقاء والعقاب والنجاة من مقام البلاء والعذاب:

स्वींय समस्त प्रकार चेष्टा-प्रचेष्टा पथभ्रष्ट व कूफ्र की अज़ाब से परीत्राण दिलाने के लिए चेष्टा करें।

23. اسمع تعلم واصمت تسلم

सुनो ताकि ज्ञानार्ज़न कर सको. चुप रहो ताकि निरापद रहो।

24. اذا أحببت فلا تکثر:

अगर किसी समय किसी (चीज़ या) व्यक्ति को दोस्त रखते हो उस की बड़ाई न करो क्योंकि प्रत्येक चीज़ का एक सीमा रहता है।

25. کمن احبک نها

अगर कोई तुमहे दोस्त रखता है तो वह तुमहे अ-सदाचर कामोंसे दूर रखता है।

26. :الحسد شر الأمراض

हिँसा (बूग्ज़) बद्तरीन व्याधी है।

27. الإيمان بريء من الحسد

ईमान बुग्ज़ से दूर है (जहाँ बूग्ज़ हो उस से दूर रहो )।

28. الحقد مثار الغضب:

बूग्ज़, गुस से का कारण है।

29. الحقود معذب النفس متضاعف الهم:

30. و مودة الاحمق فانه يضرب من حيث يری انه ينفعک و يسوءک و هو يری أنه يسرک:

अज्ञानी व्यक्तियों से दोस्ती करने से विरत रहना. क्योंकि वह चाहता है कि तुम को लाभ पहुंचाए, लेकिन नुक़्सान व्यतीत कुछ नहीं पहुंचाता। और तुम को असंतोष्ट करता है और अपनो को एक ख़ुशहाल और पथ प्रदर्शक समझता है।

31. فساد العقل الاغترار بالخدع

धोका के सामने अक़्ल मुग्ध हो जाती है।

32. ما العاجلة خدعتک ولکن بها انخدعت:

यह पृथ्वी नहीं है कि तुम को धोका देती है बल्कि तुम हो कि धोका ख़ाए हो।